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Beti Hai Anmol Yojna (बेटी है अनमोल योजना)

बेटी है अनमोल योजना

उद्देश्य:
समाज में महिलाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण  पैदा करना, बालिका जन्म व बालिका शिक्षा  को प्रोत्साहित करना तथा बाल विवाह को रोकना। योजना के अन्तर्गत अधिकतम 2 बालिकाओं को जन्मोपरान्त अनुदान व पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक छात्रवृति दी जाती है।

पा़त्रता:
  • बालिका के जन्म के समय परिवार गरीबी रेखा से नीचे हो।
सहायता राशि:
  1. जन्मोपरान्त अनुदान 10,000/- रु. 
    • (बालिका के नाम पर उसके व्यसक होने तक एफ.डी. की जाती है जो बाल विकास परियोजना अधिकारी के नाम बन्धक रखी जाती है, यदि बालिका विवाह 18 वर्ष से पूर्व हो या उसकी मृत्यु हो जाए तो सारी राशि विभाग को वापिस हो जाती है )
  2. वार्षिक  छात्रवृतिः प्रतिवर्ष  कक्षा उतीर्ण करने पर (पहली से 12 वी कक्षा तक) 
    • पहली से तीसरी कक्षा            300 रू.
    • चौथी कक्षा 500 रू.
    • पांचवी कक्षा 600 रू.
    • छटी से सातवी कक्षा              700 रू.
    • आठवी कक्षा                        800 रू.
    • नवी व दसवी कक्षा 1000रू.
    • ग्यारवी व बारहवी कक्षा 1500रू.
आवेदन प्रक्रिया:
आवेदन पत्र निम्नलिखित दस्तावेज सहित बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय मे जमा करेंः
  1. बेटी जन्म का प्रमाण पत्र,
  2. बी.पी.एल प्रमाण पत्र
  3. हिमाचली प्रमाण पत्र
  4. आधार कार्ड की छायाप्रति,
  5. ग्राम सभा का प्रस्ताव,
  6. आवेदन पत्र/फार्म पंचायत प्रधान तथा पंचायत सचिव द्वारा प्रमाणित किया गया हो।
  7. यदि परिवार अनुसूचित जाति से सम्बन्धित है तो जाति प्रमाण पत्र,
  8. छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन करना है तथा पास की गई कक्षा का प्रमाण पत्र सलंगन करें।
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Widow Remariage Scheme (विधवा पुनर्विवाह योजना )

विधवा पुनर्विवाह योजना 

उद्देश्य:
इस योजना का मुख्य उद्देश्य विधवाओं के पूर्नवास में सहायता करने हेतु पुरुषों  को विधवा महिला के साथ विवाह करने हेतु आर्थिक सहायता देकर प्रोत्साहित करना है।

पात्रता:
  • विधवाएं जिनकी आयु 18 वर्ष से 50 वर्ष  के मध्य हो,
  • पुरुश जिसकेे साथ विवाह होना है की आयु 21 से 50 वर्ष  के मध्य हो। 
सहायता राशि:
सहायता राशि 50000/- रु. ; 20,000/- रु. ऍफ़. डी.  द्वारा बैंक खाते मे जमा किया जाता है तथा मु. 30,000/- की एफ.डी. दुल्हन के नाम 5 वर्षो के लिए की जाती है।

आवेदन प्रक्रिया:
आवेदन पत्र विवाह होने के छः माह के भीतर निम्नलिखित दस्तावेज सहित बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय मे जमा करेंः
  1. लड़की व लड़के का हिमाचली प्रमाण पत्र,
  2. लड़का व लड़की का आयु प्रमाण पत्र,
  3. पहले पति की मृत्यु का प्रमाण पत्र
  4. विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र।
  5. पुनर्विवाह पश्चात परिवार रजिस्टर की नकल,
  6. पति पत्नि का संयुक्त फोटो,
  7. आधार कार्ड की छायाप्रति,
  8. ग्राम सभा का प्रस्ताव,
  9. आवेदन पत्र/फार्म पंचायत प्रधान तथा पंचायत सचिव द्वारा प्रमाणित किया गया हो।
आवेदन प्रपत्र 
  आवेदन  प्रपत्र डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें
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Mukyamantri Kanyadaan Yojna (मुख्यमन्त्री कन्यादान योजना)

मुख्यमन्त्री कन्यादान योजना

उद्देश्य:
 बेसहारा महिलाओं/विधवाओं को अधिकतम 2 बेटियों के विवाह हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना।

पात्रता:
जिन्हे अपनी बेटी का विवाह करना हो ऐसीः
  • बेसहारा महिलाएं/विधवाएं, 
  • नारी सेवा सदन की पूर्व प्रवासिनी हो, 
  • जिनकी मांताए उपेक्षित, पति द्वारा त्यागी गई, तलाकशुदा  महिलाएं हो,
  • जिनके पिता शारीरिक या मानसिक विकलांगता/लम्बी बीमारी से पीडित होने के कारण शैयाग्रस्त होने के कारण अपनी आजीविका कमाने में असमर्थ हो, 
  • जिनके संरक्षकों की वार्षिक आय 35,000/-रु0 से अधिक न हो। 
सहायता राशि:
25,000/-रु0 का अनुदान।

आवेदन प्रक्रिया:
आवेदन पत्र विवाह तिथि निर्धारित होने के बाद अथवा विवाह होने के छः माह के भीतर निम्नलिखित दस्तावेज सहित बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय मे जमा करेंः
  1. लड़की व लड़के का हिमाचली प्रमाण पत्र।
  2. लड़का व लड़की का आयु प्रमाण पत्र।
  3. विवाह की निर्धारित तिथि का प्रमाण पत्र जो ग्राम पंचायत/शहरी निकाय द्वारा जारी हो । यदि विवाह हो चुका हो तो विवाह पंजीयक से जारी प्रमाण पत्र।
  4. आय का प्रमाण पत्र,
  5. पति की मृत्यु अथवा निःसहाय प्रमाण पत्र,
  6. हिमाचली प्रमाण पत्र,
  7. परिवार रजिस्टर की नकल,
  8. आधार कार्ड की छायाप्रति,
  9. ग्राम सभा का प्रस्ताव,
  10. आवेदन पत्र/फार्म पंचायत प्रधान तथा पंचायत सचिव द्वारा प्रमाणित किया गया हो।

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Mother Teresa Asahay Matri Sambal Yojna (मदर टेरेसा असहाय मातृ सम्बल योजना)

मदर टेरेसा असहाय मातृ सम्बल योजना

उद्देश्य:
  बेसहारा महिलाओं/विधवाओं को अधिकतम 2 बच्चों तक उनके  पालन-पोषण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना ।

पात्रता:
  • गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों की निःसहाय महिलांए:
    • विधवा महिलाएं,
    • तलाकशुदा महिलाएं,
    • महिलाएं जिनके पति दो साल से लापता हों और सम्बन्धित थाना में उनके न मिलने की रिपोर्ट दर्ज हों, या 
  • उक्त श्रेणी की महिलाएं यदि गरीबी रेखा से नीचे न हों तो परिवार की वार्षिक 35000/- रु. तक हो। 
  • जिनके बच्चे 18 वर्ष की आयु से कम हों 
सहायता राशि:
दो बच्चों तक प्रति वर्ष 3000/- रु. प्रति बच्चा 18 वर्ष तक की आयु तक।

आवेदन प्रक्रिया:
आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेज बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय मे जमा करेंः
  1. आय का प्रमाण पत्र,
  2. पति की मृत्यु अथवा निःसहाय प्रमाण पत्र,
  3. हिमाचली प्रमाण पत्र,
  4. परिवार रजिस्टर की नकल,
  5. आधार कार्ड की छायाप्रति,
  6. ग्राम सभा का प्रस्ताव,
  7. आवेदन पत्र/फार्म पंचायत प्रधान तथा पंचायत सचिव द्वारा प्रमाणित किया गया हो।


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स्तनपान- स्पर्श की तपिश और अनुरक्ति का अहसास



शिशु के जन्म होते ही पहले स्पर्श का भी समय हो जाता है। स्पर्श की तपिश और अनुरक्ति का अहसास इतने बचपन में भी होता है। माँ की गर्मी के पास और साथ रह कर शिशु एक जुड़ाव महसूस करता है, स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है। शिशु को साफ और मुलायम कपड़ो में सही तरीके से लपेट कर जितनी जल्दी हो सके माँ को सौंप देना चाहिये। प्रसव के आधे घंटे के अंदर स्तनपान करवाना चाहिये। यह अवधि सीज़ेरियन प्रसव से हुए बच्चों के लिये एक घंटा मानी जा सकती है।
 Cow's milk is for the calf....your child needs yours!!
गाय का दूध बछड़े के लिये...आपके बच्चे को आपके दूध की जरूरत है।


हर माँ का दूध उसके शिशु के लिये एकदम उपयुक्त होता है। मतलब कि अगर शिशु 28 हफ्ते में ही जन्म ले तो उसके पाचन शक्ति और जरूरत के हिसाब का सही मात्रा में प्रोटीन्स, विटामिन्स और चर्बी दूध में होती है। जैसे उस शिशु के लिये उसके जरूरत के अनुसार खास ऑर्डर पर तैयार किया गया हो।
माँ का दूध मतलब माँ के आँचल में रह कर मिलने वाली खोराक- साफ, बिना झंझट, हमेशा फ्रेश, स्टेरिलाइसेशन की आवश्यकता से दूर, हमेशा माँ के पास, माँ के साथ...सही मात्रा में प्रोटीन, विटामिन्स,ग्लूकोस, फैट। साथ में रोग प्रतिकारक शक्ति। माँ से लगातार गहराता जुड़ाव। काउ मिल्क अलर्जी से दूर।
फायदें इतने हैं कि यह समझना कठिन है कि यहाँ भी फैशन ने बाजी मार ली है। फैशन, ट्रैन्ड, फिगर और कठिनाई जैसे बहानों का इस्तेमाल कर शिशु को इससे वँचित रखना दुखद है।
नवजात शिशु को देखना हमेशा एक सुंदर अनुभव रहा है। माँ के पास गर्म , मुलायम कपड़ों में लिपटा शिशु जल्द ही बगल में मुड़कर माँ को तलाशना शुरु करता है। होठों पर जीभ फेरकर दूध की माँग रखता है। यही सही समय है स्तनपान शुरु करने का।
शिशु के लिये स्तनपान सीखी हुई एक बात है। किन्तु पहली बार बनी माँ के लिये यह एकदम नया अनुभव है। माँ को सहजता से इसकी शुरुआत करनी चाहिये। माँ की विकलता शिशु तुरंत भाँप लेता है...इसीलिये परेशान माँ का शिशु भी अक्सर चिढ़चिढ़ा हो जाता है।
पहली बार स्तन से लगाना अपने आप में एक प्रक्रिया है। इसे लैच्चिंग ऑन कहते हैं। अगर सही तरीके से स्तनपान की शुरुआत की जाये तो माँ और शिशु के बीच के रिश्ते को अच्छी और तनाव रहित शुरुआत मिल सकती है।
1.शिशु का मुँह पूरी तरह खुलवायें। हल्के से शिशु के होंठ स्तन पर लगाने से वह पूरा मुँह खोल देगा...ऐसे जैसे उबासी में खोलते हैं।
2. फिर जिस हाथ में शिशु को सँभाला है उसे पास लाकर शिशु को स्तन के पास लाना है। ध्यान रहना चाहिये कि शिशु को माँ की तरफ लाया जाये ना कि माँ को शिशु की तरफ।
ध्यान रहे कि शिशु के मसूड़े स्तन के आसपास के एरियोला (स्तन के पास गहरे रंग की त्वचा)को पूरी तरह से मुँह के अंदर लें। शिशु के होंठ बाहर की तरफ मुड़े हुए हों।
3. इतना करने पर शिशु स्तन चूस कर दूध पीने की कोशिश करेगा। 
अगर शिशु स्तन से सही तरीके से जुड़ा हो और सही तरह से चूस रहा हो तो इस प्रक्रिया में स्तन में दर्द नहीं उठना चाहिये। अगर दर्द उठे तो स्तनपान रोक कर फिर कोशिश करनी चाहिये। शिशु के स्तन पकड़ने पर वैक्यूम बनता है और सक्शन एफैक्ट से दूध खिंचता है। जब भी शिशु को स्तन से हटाना हो तो स्तन और मसूड़े के बीच उँगली ड़ाल कर पहले वैक्यूम खत्म करें। कभी भी गलत तरीके से स्तनपान जारी ना रखे। इससे स्तन पर चीरे पड़ने का डर रहता है और शिशु को भी पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं मिलता। 
माँ और शिशु के रिश्ते का एक अहम पहलू है स्तनपान। माँ की खुशबू, सपर्श की तपिश, और माँ की गोद की सुरक्षा...इन सबके लिये पहला अनुभव है स्तनपान। स्वाभाविक क्रिया है और जितना सहजता और आनंद से निभाया जाये उतनी ही संतुष्टि दोनो को मिलती है।


छह महीने तक शिशु को मात्र स्तनपान देने से उसकी सभी खोराक की जरूरत पूरी हो जाती है। सिर्फ माँ का दूध उसके लिये पर्याप्त है। इसे एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीड़िंग कहते हैं। छह महीने से माँ के दूध के अलावा कुछ और भी शुरू किया जाना चाहिये। स्तनपान मात्र खोराक ही नहीं पूरा करता किंतु इससे शिशु का पहला स्नेह संबंध बनता है। 
कहते हैं भगवान ने माँ को इसलिये बनाया क्योंकि हर जगह हर समय हर शिशु के पास नहीं रह सकता....काश हर शिशु के पास उसका अपना भगवान ......उसकी माँ हो....जो उसे ममता से सँभाल,दूध से सींच,स्नेह से छू....उसको उसकी अपनी पहचान दे.....

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Workshop on Declining Child Sex Ratio

A District Level Workshop on Declining Child Sex Ratio was organised on 21 March 2013 at Conference Hall of DC Office Solan. More than 60 participants comprising district level officers, Principals, Chairperson Zila Parshad,other representatives from PRIs , NGOs, attended the workshop




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National Nutrtion Week- 2012

National Nutrition Week is being celebrated from 1st to 7th September, 2012 and theme for this year is:

 ‘Nutrition Awareness-Key to Healthy Nation’. 

 During the week, issues such as appropriate diet to be taken during adolescent, pregnancy, lactation, infancy and young childhood would be discussed and awareness to be created amongst the people. He said that nutrition was a key to survival, health and development an individual and mainly constitutes the foundation of over all personality development.

Articles/ Reading Material on  Nutrition at this website is listed below :


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