Sunday, August 17, 2014

National Nutrition Week - 2014

National Nutrition Week is being celebrated from 1st to 7th September, 2014 and theme for this year is:

 ‘Poshak  Aahar; Desh ka Aadhar’. 

 The basic objective is to intensify awareness generation on the importance of nutrition for health which has an impact on development, productivity,  economic growth and ultimately national development.
Nutrition is an issue of survival, health and development for current and future generations.
Child born underweight have impaired immune function and increased risk of diseases such as diabetes and heart diseases later in life. Malnourished children tend to have lower IQ and I'm pared cognitive ability, thus affecting their school performance and then productivity in their later life.
During the week, issues such as appropriate diet to be taken during adolescent, pregnancy, lactation, infancy and young childhood would be discussed and awareness to be created amongst the people. He said that nutrition was a key to survival, health and development an individual and mainly constitutes the foundation of over all personality development.

Articles/ Reading Material on  Nutrition at this website is listed below :

Saturday, July 26, 2014

Women and Child Development, Himachal Pradesh

Welcome to my Blog

 Women and Child Development
Himachal Pradesh

The Department of Women and Child Development provides service to the Women and Children.
ICDS promotes child survival and development through an integrated approach for converging basic services for improved child care, early stimulation and learning, improved enrolment and retention, health and nutrition, and water and envirolmental sanitation.
Establishing integrated delivery of services in a responsive, proactive, sustainable and continuous manner through convergent efforts, shared leadership and common accountability. AWCs are first point of contact for all kind of delivery of services related to Health, Nutrition, Pre- School Education for Children and Health and Nutrition & Empowerment for Adolescent girls and Women in general.
- SK Tegta, DPO, Solan HP

स्तनपान केवल पोषण ही नहीं, जीवन की धारा है


स्‍तनपान शिशु के जन्‍म के पश्‍चात एक स्‍वाभाविक क्रिया है। परन्‍तु पहली बार माँ बनने वाली माताओं को शुरू में स्‍तनपान कराने हेतु सहायता की आवश्‍यकता होती है। स्‍तनपान के बारे में सही ज्ञान के अभाव में जानकारी न होने के कारण बच्‍चों में कुपोषण का रोग एवं संक्रमण से दस्‍त हो जाते हैं।  स्तनपान शिशु के लिए संरक्षण और संवर्धन का काम करता है। मां का दूध (स्तनपान) केवल पोषण ही नहीं, जीवन की धारा है,  ज़िन्दगी के लिए अमृत समान  है.। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
क्यों ज़रूरी है स्तनपान   
  • स्तनपान शिशु के लिए संपूर्ण पूरक और पोषक आहार है।
  • यह हर मौसम में सही तापमान पर बच्चे के शरीर में पहुंचता है।
  • स्तनपान करने वाले शिशु सामान्य शिशुओं की तुलना में कम बीमार पड़ते है। 
कोलस्ट्रम और उसके फायदे
मां के पहले दूध में कोलस्ट्रम पाया जाता है। कोलस्ट्रम पीले रंग का गाढ़ा दूध होता है, जो कि शिशु को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। बच्चे के जन्म के दो से चार दिन के बाद यह सामान्य दूध में बदल जाता है। समय से पहले पैदा हुए बच्चों के लिए कोलस्ट्रम बहुत आवश्यक है।
  • कोलस्ट्रम में अधिक मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, मिनेरल और इम्यूनोग्लोबुलिन नामक पदार्थ पाये जाते हैं, जो शिशु की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बेहतर बनाते है।
  • शिशुओं को पेट की समस्याओं से बचाता है कोलस्ट्रम। 
  • भारी मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, मिनेरल होने के कारण कोलस्ट्रम शिशु की हडडियों के विकास के लिए और संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक है।
  • कोलस्ट्रम शिशु को संक्रामक रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है।
किस उम्र के बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए
  • नवजात शिशु को पहले 6 महीनों तक सिर्फ मां का दूध देना चाहिए, यहां तक कि पानी भी नहीं देना चाहिए। क्योंकि मां के दूध में पर्याप्त मात्रा में पानी भी होता है इसलिए बच्चों को पानी की भी आवश्यकता नहीं होती। 
  • 6 महीनों कें बाद शिशुओं को मां के दूध के साथ ठोस आहार देना शुरू करना चाहिए। शिशु का आहार तैयार करते समय साफ सफार्इ का खास ख्याल रखना चाहिएा शिशु का आहार तैयार करने से पहले हाथ साबुन से ज़रूर धुलेां बच्चे को ताज़ा और पोषक आहार दे। जब शिशु मां के दूध से ठोस आहार की ओर जाता है तो ऐसे में शिशु में पोषण की कमी होने का खतरा अधिक रहता है। ठोस आहार के साथ मां का दूध कम से कम दो  साल तक शिशु को देना चाहिए।
शिशुओं को स्तनपान कराने के लाभ
  • स्तनपान करने वाले शिशुओं में पेट की समस्याएं कम होती हैं क्योंकि मां का दूध आसानी से पच जाता है।
  • मां का दूध नवजात शिशु को एलर्जी, डायरिया, उलिटयां लगने और कान के संक्रमण से बचाता है।
  • बढ़ते शिशु को उसकी आवश्यकतानुसार मां का दूध सही मात्रा में प्राप्त होता है।
  • स्तनपान बच्चों में जन्म के समय होने वाली बीमारियों के खतरे को कम करता है।
  • यह भविष्य में होने वाली बीमारियों की भी सम्भावना कम करता है जैसे डायबिटीज, पेट की समस्याएं, कैंसर, रक्तचाप आदि । 
स्तनपान से मां को होने वाले लाभ
स्तनपान के फायदे सिर्फ शिशुओं में ही नहीं, बलिक मांओं में भी देखने को मिलते है।
  1. बीमारियों का खतरा कमस्तनपान कराने वाली महिलाओं में मधुमेह, स्तन कैंसर, ओवरी के कैंसर और पोस्टपार्टम डिप्रेशन का खतरा कम रहता है।
  2. पैसों की बचतदूध गर्म करने और बाजार से खरीदने का खर्च नहीं रहता। स्तनपान करने वाले बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं , इसलिए आपको बार- बार डाक्टर के पास नहीं जाना पड़ता।
  3. तनाव कम होता है : बच्चा जहां मां की गोद में अधिक सुरक्षित अनुभव करता है, वहीं मां को भी बच्चे के साथ थोड़ा समय मिल जाता है। शिशु की त्वचा के संपर्क में आने से महिलाओं में आकिसटोसिन नामक हार्मोन बनता है, जिससे तनाव कम होता है ।
  4. अधिक वज़न से छुटकारास्तनपान कराने वाली महिलाओं को अधिक कैलोरीज की आवश्यकता होती है, जिससे वज़न कम होता है और यूटेरस भी जल्दी आकार में आ जाता है।
फार्मूला फीड और मां के दूध में अंतर
  • मां का दूध शिशुओं के लिए सर्वोत्तम आहार है क्योंकि यह एलर्जी, अस्थमा और बहुत सी बीमारियों से शिशुओं को बचाता है। फार्मूला फीड से बच्चों का पेट भरा रहता है, लेकिन उन्हें मां के दूध जितना पोषण नहीं मिलता।
  • मां का दूध हर समय सही तापमान पर उपलब्ध होता है, लेकिन फार्मूला फीड को गर्म करके तैयार करना पड़ता है। इसके अलावा अगर फार्मूला फीड सफार्इ से ना तैयार किया जाये तो इससे संक्रमण का खतरा रहता है।
  • फार्मूला फीड को एक बार बनाने के बाद दोबारा प्रयोग नहीं करना चाहिएा इसे तैयार करने में कम से  कम 5 मिनट का समय लगता है।

Thursday, July 17, 2014

World Breastfeeding Week 2014


World Breastfeeding Week 2014

WABA has announced that the slogan and theme for

BREASTFEEDING: A Winning Goal - For Life!
This year's WABA World Breastfeeding Week (WBW) theme asserts the importance of increasing and sustaining the protection, promotion and support of breastfeeding - in the Millennium Development Goals (MDGs) countdown, and beyond.



Resources :

Wednesday, July 16, 2014

माता शबरी महिला सशक्तिकरण योजना

माता शबरी महिला सशक्तिकरण योजना

उद्देश्य:

  • गरीबी रेखा से नीचे रह रहे अनुसूचित जाति के परिवारों की महिलाओं को अनुदान प्रदान करके उन्हें घरेलु कार्यों हेतु ईंधन, लकडी एकत्रित करने जैसे कार्यों से राहत दिलवाना
  • पर्यावरण में सुधार लाना। प्रत्येक वर्श प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में 75 लाभार्थियों को इस योजना में लाभान्वित किया जाता है।
पा़त्रता:
  • गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों से सम्बन्धित महिलाएं
  • ऐसी महिलाएं जिन के परिवारों की वार्षिक  आय 35,000/-रु0 से अधिक न हो, 
  • महिला के साथ रह रहे परिवार सदस्य एल0पी0जी0 गैस कनैक्शन धारक न हों। 

सहायता राशि:
  1. एल0पी0जी0 गैस कनैक्शन, चूल्हा व अन्य सम्बंधित सामग्री की खरीद पर आई कुल लागत  के 50%  राशी की प्रतिपूर्ति जिसकी अधिकतम सीमा 1300 /- होगी उपदान के रूप में उपलब्ध करवाई जाएगी  ।
आवेदन प्रक्रिया:
आवेदन पत्र निम्नलिखित दस्तावेज सहित बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय मे जमा करेंः


  1. बी.पी.एल प्रमाण पत्र।
  2. बी0पी0एल0 प्रमाण पत्र।
  3. वार्षिक आय प्रमाण पत्र।
  4. अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र।
  5. ग्राम सभा प्रस्ताव।
  6. आधार कार्ड की प्रति।
  7. राशन कार्ड की प्रति।

Beti Hai Anmol Yojna (बेटी है अनमोल योजना)

बेटी है अनमोल योजना

उद्देश्य:
समाज में महिलाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण  पैदा करना, बालिका जन्म व बालिका शिक्षा  को प्रोत्साहित करना तथा बाल विवाह को रोकना। योजना के अन्तर्गत अधिकतम 2 बालिकाओं को जन्मोपरान्त अनुदान व पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक छात्रवृति दी जाती है।

पा़त्रता:
  • बालिका के जन्म के समय परिवार गरीबी रेखा से नीचे हो।
सहायता राशि:
  1. जन्मोपरान्त अनुदान 10,000/- रु. 
    • (बालिका के नाम पर उसके व्यसक होने तक एफ.डी. की जाती है जो बाल विकास परियोजना अधिकारी के नाम बन्धक रखी जाती है, यदि बालिका विवाह 18 वर्ष से पूर्व हो या उसकी मृत्यु हो जाए तो सारी राशि विभाग को वापिस हो जाती है )
  2. वार्षिक  छात्रवृतिः प्रतिवर्ष  कक्षा उतीर्ण करने पर (पहली से 12 वी कक्षा तक) 
    • पहली से तीसरी कक्षा            300 रू.
    • चौथी कक्षा 500 रू.
    • पांचवी कक्षा 600 रू.
    • छटी से सातवी कक्षा              700 रू.
    • आठवी कक्षा                        800 रू.
    • नवी व दसवी कक्षा 1000रू.
    • ग्यारवी व बारहवी कक्षा 1500रू.
आवेदन प्रक्रिया:
आवेदन पत्र निम्नलिखित दस्तावेज सहित बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय मे जमा करेंः
  1. बेटी जन्म का प्रमाण पत्र,
  2. बी.पी.एल प्रमाण पत्र
  3. हिमाचली प्रमाण पत्र
  4. आधार कार्ड की छायाप्रति,
  5. ग्राम सभा का प्रस्ताव,
  6. आवेदन पत्र/फार्म पंचायत प्रधान तथा पंचायत सचिव द्वारा प्रमाणित किया गया हो।
  7. यदि परिवार अनुसूचित जाति से सम्बन्धित है तो जाति प्रमाण पत्र,
  8. छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन करना है तथा पास की गई कक्षा का प्रमाण पत्र सलंगन करें।

Widow Remariage Scheme (विधवा पुनर्विवाह योजना )

विधवा पुनर्विवाह योजना 

उद्देश्य:
इस योजना का मुख्य उद्देश्य विधवाओं के पूर्नवास में सहायता करने हेतु पुरुषों  को विधवा महिला के साथ विवाह करने हेतु आर्थिक सहायता देकर प्रोत्साहित करना है।

पात्रता:
  • विधवाएं जिनकी आयु 18 वर्ष से 50 वर्ष  के मध्य हो,
  • पुरुश जिसकेे साथ विवाह होना है की आयु 21 से 50 वर्ष  के मध्य हो। 
सहायता राशि:
सहायता राशि 50000/- रु. ; 20,000/- रु. ऍफ़. डी.  द्वारा बैंक खाते मे जमा किया जाता है तथा मु. 30,000/- की एफ.डी. दुल्हन के नाम 5 वर्षो के लिए की जाती है।

आवेदन प्रक्रिया:
आवेदन पत्र विवाह होने के छः माह के भीतर निम्नलिखित दस्तावेज सहित बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय मे जमा करेंः
  1. लड़की व लड़के का हिमाचली प्रमाण पत्र,
  2. लड़का व लड़की का आयु प्रमाण पत्र,
  3. पहले पति की मृत्यु का प्रमाण पत्र
  4. विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र।
  5. पुनर्विवाह पश्चात परिवार रजिस्टर की नकल,
  6. पति पत्नि का संयुक्त फोटो,
  7. आधार कार्ड की छायाप्रति,
  8. ग्राम सभा का प्रस्ताव,
  9. आवेदन पत्र/फार्म पंचायत प्रधान तथा पंचायत सचिव द्वारा प्रमाणित किया गया हो।
आवेदन प्रपत्र 
  आवेदन  प्रपत्र डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें

What is ICDS ?

  • ICDS promotes child survival and development through an integrated approach for converging basic services for improved child care, early stimulation and learning, improved enrolment and retention, health and nutrition, and water and envirolmental sanitation.
  • Integrated and inter-sectoral nature, coordination mechanism, community involvement, training infrastructure and monitoring system make ICDS a unique programme.
  • ICDS has the potential to achieve the major national nutrition, health and educational goals of the National Plan of Action for Children.
  • ICDS provides increased opportunities for according children their rights.
  • ICDS through its advocacy and social mobilisation components aims to empower the community using communication channels and media as tools for development.