Wednesday, May 30, 2012

समेकित बाल विकास सेवा कार्यक्रम

समेकित बाल विकास सेवा कार्यक्रम
परिचय
समेकित बाल विकास सेवा कार्यक्रम एक 100 प्रतिशत केन्द्रीय प्रायोजित योजना है जिसका उदगम बच्चो के लिए वर्ष 1974 मे बनी राष्ट्रीय बाल नीति, जिसमें कि बच्चों को राष्ट्र की परम महत्वपूर्ण सम्पति माना गया है, से हुआ है । इस कार्यक्रम का प्रारम्भ 2 अक्तूबर, 1975 को  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म दिवस से हुआ और प्रयोग के तौर पर यह कार्यक्रम सम्पूर्ण भारतवर्ष के चुने हुए 33 विकास खण्डों मे चलाया गया । हिमाचल प्रदेश में यह कार्यक्रम किन्नौर जिले के पूह विकास खण्ड मे प्रारम्भ हुआ । वर्तमान में इस प्रदेश के समस्त 75 विकास खण्डों मे और शिमला शहर में यह कार्यक्रम 18248 आंगनबाडी केन्द्रो के माध्यम से सफलता पूर्वक चलाया जा रहा है । इस कार्यक्रम के अन्तर्गत 76 बाल विकास परियोजनाएं चलाई जा रही है ।
कार्यक्रम के उद्देश्य
  • छः साल तक की आयु के बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य में सुधार लाना ।
  • बच्चों के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक व बौद्धिक विकास की नींव रखना ।
  • बाल मृत्यु दर व बच्चों में कुपोषण में कमी लाना ।
  • बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर में कमी लाना ।
  • गर्भवती व दूध पिलाने वाली माताओं के स्वास्थ्य व पोषण स्तर में सुधार लाना।           
  • महिलाओ में स्वास्थ्य व पोषण बारे जागृति ला कर उन्हें इस काबिल बनाना कि वे अपने परिवार तथा विशेषतौर से अपनी और बच्चों की पौषाहार व स्वास्थ्य जरूरतों को स्वयं पूरा कर सके ।
आंगनबाड़ी में सेवाऐं
  • पूरक पौषाहार
  • अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा
  • टीकाकरण
  • स्वास्थ्य जांच
  • पौषाहार एवं स्वास्थ्य शिक्षा
  • सन्दर्भ सेवाएं
1. पूरक पौषाहार कार्यक्रम 
गर्भवती व दूध पिलाने वाली माताओं व 6 वर्ष तक की आयु के बच्चो को आंगनबाड़ी में पूरक पौषाहार उपलब्ध करवाया जाता है ।
  • पौषाहार की दरें
प्रदेश सरकार 1.12.05 से बढी हुई दरों पर पौषाहार उपलब्ध करवा रही है । यह दरें निम्न रूप से हैः-
(दरें प्रति महिला/बच्चा प्रति दिन)
लाभ भोगी
आहार की लागत
ईधन व्यय
परिवहन व्यय
कुल
1. गर्भवती महिलाएं
4.70रू0
0.25रू0
0.15रू0
5.00रू0
2. दूध पिलाने वाली महिलाएं
4.70 रू0
0.25 रू0
0.15 रू0
5.00 रू0
3. किशोरियां
4.70रू0
0.25 रू0
0.15 रू0
5.00 रू0
4.बच्चे
3.60रू0
0.25 रू0
0.15 रू0
4.00 रू0
5. अति कुपोषित बच्चे
5.60रू0
0.25 रू0
0.15 रू0
600 रू0

  • पौषाहार का चयन
पौषाहार के चयन व क्रय हेतु राज्य स्तर पर निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता की अध्यक्षता में एक चयन समिति गठित है । प्रबन्ध निदेशक, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, निदेशक स्वास्थ्य, निदेशक खाद्य एंव आपूर्ति, क्रय समिति के सदस्य है । समिति पौषाहार का चयन प्रत्येक चौमाही के पश्चात करती है । खाद्यान्न सामग्री की गुणवता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी आई0सी0डी0एस0 व क्षेत्रीय प्रबन्धक, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा खाद्यन्ना सामग्री का संयुक्त निरीक्षण किया जाता है ।
2. अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा
  • अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को उपलब्ध करवाई जाती है ।
  • इस सेवा का उद्देश्य बच्चों का शारीरिक,मानसिक,सामाजिक एवं बौद्धिक विकास     करना है ।
  • बच्चों को अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा खेल-खेल में चार्टो व खिलौनों इत्यादि के   माध्यम से दी जाती है ।
  • इस शिक्षा से बच्चे की मानसिक तौर पर स्कूल जाने की तैयारी हो जाती है ।
  • अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा के फलस्वरूप बच्चों में प्राईमरी कक्षा में ही स्कूल छोड़ने की आदत में कमी आती है और बच्चा स्कूल जाने में प्रसन्नता अनुभव करता है ।
3.  टीकाकरण
  • गर्भवती माताओं को टेटनस व बच्चों को काली खांसी, खसरा, पोलियो जैसी बिमारियों से बचाव के लिए समय-समय पर टीके लगाने आवश्यक है ।
  • आगंनवाड़ी कार्यकर्ता स्वास्थय कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल करके बच्चों व गर्भवती   माताओं के टीकाकरण की व्यवस्था करती हैं ।
  • टीकों का विवरण व उनको लगाने का समय निम्न तालिका में दिया गया हैः-
          तालिका


टीके का नाम
जिसको लगता है
टीका लगवाने का समय
1. टेटनस   
गर्भवती महिला
प्रथम प्रसूति में गर्भ के एक माह पश्चात व दूसरा एक माह के पश्चात
2. बी0सी0जी0
बच्चे को
जन्म के तुरन्त बाद या एक माह के भीतर
3. पोलियो(बूंदें) व डी0पी0टी0 पहला डोज
बच्चे को
बी0सी0जी0 के टीके के एक माह के बाद
4. पोलियो (बूंदें) व डी0पी0टी0 दूसरा डोज
बच्चे को
पोलियो व डी0पी0टी0 पहला डोज के एक माह के बाद
5. पोलियो (बूंदें) व डी0पी0टी0 तीसरा  डोज
बच्चे को
पोलियो व डी0पी0टी0 दूसरा डोज के एक माह के बाद
6. खसरा
बच्चे को
जन्म के 9-12 माह के दौरान
7. पोलियो बूस्टर
बच्चे को
जन्म के 16-24 माह के दौरान
8. डी0पी0टी0बूस्टर
बच्चे को
जन्म के 16-24 माह के दौरान

4. स्वास्थ्य जांच
  • गर्भवती माताओं, दूध पिलाने वाली माहिलाओं व बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक न्याय  एवं अधिकारिता विभाग स्वास्थ्य विभाग के साथ तालमेल करता है ।
  • चिकित्सा अधिकारी, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता व महिला नर्स को अपने क्षेत्र में आने वाले सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों व माताओं की मासिक स्वास्थ्य जांच करनी होती है ।
  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी हर माह 15 तारीख को बच्चों का वजन लेती है और बच्चे को   स्वास्थ्य परामर्श/जांच के लिये  आवश्यकता अनुसार कार्यकर्ता रेफर भी करती है ।
  • साधारण बिमारियां, जैसे कि सर्दी, जुकाम, बुखार, फोड़े-फुंसियां, पेट के कीड़े इत्यादि के उपचार के लिये आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दवाईयों की किट उपलब्ध करवाई जाती है जिसमें से जरूरत पड़ने पर आंगनबाड़ी क्षेत्र में आने वाले स्थानीय लोंगों को कार्यकर्ता   दवाईयां उपलब्ध करवाती है ।
  • गर्भवती/प्रसूता महिलाओं में खून की कमी दूर करने के लिए उन्हें आयरन व फोलिक एसिड की गोलियां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्वयं या स्वास्थ्य कार्यकर्ता के माध्यम से उपलब्ध करवाती है ।
  • बच्चों में अन्धापन रोकने के लिए उन्हें विटामिन-ए (घोल) उपलब्ध करवाया जाता है।
5. पौषाहार एवं स्वास्थ्य शिक्षा
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आंगनवाड़ी क्षेत्र में आने वाली समस्त महिलाओं के साथ बैठक      करके या घर-2 जा कर, उन्हें स्वास्थ्य देखभाल, खाने पीने की आदतों, स्वच्छता अपनाने, सीमित परिवार के लाभ इत्यादि बारे नियमित जानकारी देती है ।
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्वास्थ्य शिक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों से महिलाओं की मुलाकात करवा कर या स्वयं स्वास्थ्य जागृति शिविरों का आयोजन भी करती है ।
  • पोषाहार शिक्षा के लिए केन्द्रीय पोषाहार बोर्ड के साथ तालमेल करके पोषाहार कैम्पो का आयोजन किया जाता है जहां पर महिलाओं को घर पर ही उपलब्ध खाद्य सामग्री से सस्ते पौष्टिक व्यंजनो के बनाने बारे जानकारी दी जाती है ।
  • मासिक बैठकों में कार्यकर्ता को जो नवीनतम पौषाहार व स्वास्थ्य देखभाल बारे जानकारी दी जाती है  उसका प्रचार कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में आने वाली महिलाओं   में गृह भ्रमण के दौरान करती है ।
  • जिला/ब्लाक/ग्राम स्तर पर विभाग जागरूकता शिविरों का आयोजन करता है ।
  • यह शिक्षा प्रत्येक माह की 15 तारीख को बच्चों के “ग्रोथ मोनिटरिंग” दिवस के   अवसर पर भी माताओं/अभिभावकों को दी जाती है ।
6.  सन्दर्भ सेवाए



  • स्वास्थ्य जांच के दौरान जो बच्चे/महिलाएं किसी गम्भीर बिमारी से प्रभावित पाये जाते है उन्हें सामुदायिक चिकित्सा केन्द्रों, जिला अस्पताल में विशेषज्ञों के परामर्श व उपचार के लिए रैफर किया जाता है ।
  • जिस बच्चे का वजन निरन्तर घट रहा हो और उसका पोषण स्तर भी गिर रहा हो उसे     भी बाल विशेषज्ञ के पास परामर्श/उपचार के लिये आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रैफर करती है ।   
अन्य सेवाएँ
1.बालिका समृद्धि योजनाः-   बालिकाओं के प्रति समाज मे साकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न हो सके, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन मिले, लडकी की कम आयु मे शादी रोकी जा सके व उसे आय उत्पादक गतिविधियों मे सहायक कौशल प्रशिक्षण प्राप्त  हो, इस आश्य से भारत सरकार द्वारा, 15 अगस्त 1997 को “बालिका समृद्धि योजना” को पूरे देश में लागू किया गया । सहायता का स्वरूप इस योजना के तहत 15 अगस्त 1997 को या उसके बाद जो भी बालिका गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे परिवार में जन्म लेती है, बालिका के जन्म होने पर पोस्ट डिलिवरी/प्रसवोतर अनुदान राशि मु0 500 रू पोस्ट आफिस या बैंक बचत खाते मे बालिका की माँ के आवेदन पर जमा करवाये जाते है । जब बालिका स्कूल जाना आरम्भ करती है तो उसे 6 से 18 वर्ष की आयु तक विभिन्न कक्षाओं के लिए विभिन्न दरों पर वार्षिक छात्रवृति भी दी जाती है । स्कीम का संचालन प्रदेश मे यह स्कीम पहले डी0आर0डी0ए0 द्वारा कार्यन्वियत की जा रही थी परन्तु वर्ष 2000-01 से यह स्कीम बाल विकास परियोजना अधिकारियों के माध्यम से संचालित की जा रही है । प्रक्रिया पात्र महिला निर्धारित प्रपत्र पर ग्रामीण क्षेत्रों मे सचिव, पंचायत अधिकारी व शहरी क्षेत्रों मे नगरपालिका अधिकारी को आवेदन कर सकती हैं । 

2. किशोरी शक्ति योजना  : इस योजना का मुख्य उद्देश्य 11 वर्ष से 18 वर्ष की आयु वर्ग की किशोरियों की स्वास्थ्य, पोषण व कौशल प्रशिक्षण सम्बन्धि जरूरतों को पूरा करना व बाल विवाह को रोकना है । पात्रता किशोरी शक्ति योजना के अन्तर्गत 11 वर्ष से 18 वर्ष की आयु वर्ग की किशोरियां स्कीम से सहायता की पात्र है । प्रक्रिया सम्बन्धित विकास खण्डों मे सर्वप्रथम किशोरियों की पहचान हेतु बाल विकास परियोजना अधिकारी, द्वारा सर्वेक्षण किया जाता है तत्पश्चात योजना से प्राप्त होने वाले विभिन्न लाभों के लिए किशोरियों की शैक्षिक योग्यता के आधार पर चयन किया जाता है । सहायता का स्वरूप किशोरियों को लाभ हेतु आंगनबाड़ी केंन्द्रों में पंजीकृत करना उन्हें पूरक पोषाहार, पोषाहार व स्वास्थ्य शिक्षा, निजि स्वच्छता व परिवार कल्याण बारे जानकारी देना, विभिन्न स्कीमों/ वैधानिक उपायों की जानकारी  देना तथा कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना इत्यादि । 

Monday, February 13, 2012

Income Tax Calculator

Calculate Income Tax automatically
You can calculate your income tax for the assessment year 2011-12 by just entering a few data relating to your basic pay, grade pay and deductions etc. The excel software will prepare income statement, Form-16 and Sahaj form for you. Download the file by clicking the link below and enjoy calculating !!

Income Tax Calculator

Pre School Worksheets for VLCC Programme

Pre School Worksheets for VLCC Programme
Circle level annual VLCC programmes are organised in the month of February. Worksheets for conducting PSE activities can be downloaded by clicking the link below.!!

Thursday, January 5, 2012

Telephone Numbers



दूरभाष सम्पर्क
सचिवालय
अधिकारी
दूरभाष नम्बर (कार्यालय)
प्रधान सचिव
0177-2622382
संयुक्त सचिव0177-2621855

निदेशालय (सा0 न्याय एवं अधिकारी0) से सम्बन्धित अधिकारी
अधिकारी
दूरभाष नम्बर (कार्यालय)
निदेशक(सा0 न्याय एवं अधि0)
0177-2622033,2621957
अतिरिक्त निदेशक(सा0 न्याय एवं अधि0)
0177-2622041
संयुक्त निदेशक (आ)
0177-2623113
उप निदेशक (कल्याण)
0177-2623006
उप निदेशक (अनु0जाति उप योजना)
0177-2622043
कार्यक्रम अधिकारी
0177-2622043
जिला कल्याण अधिकारी(मुख्यालय)
0177-2622039
विशेष पौषाहार(अधिकारी)
0177-2622039
सहायक नियन्त्रक(वित्त एवं लेखा)
0177-2622039

जिला स्तर
जिला कार्यक्रम अधिकारी, शिमला
0177-2627360
जिला कार्यक्रम अधिकारी, सोलन
01792-221934
जिला कार्यक्रम अधिकारी, सिरमौर स्थित नाहन
01702-225607
जिला कार्यक्रम अधिकारी, कांगड़ा स्थित धर्मशाला
01892-227114
जिला कार्यक्रम अधिकारी, चम्बा
01899-220307
जिला कार्यक्रम अधिकारी, बिलासपूर
01978-221514
जिला कार्यक्रम अधिकारी, मण्डी
01905-223845
जिला कार्यक्रम अधिकारी, कुल्लू
01902-222105
जिला कार्यक्रम अधिकारी, हमीरपुर
01972-225085
जिला कार्यक्रम अधिकारी, ऊना
01975-228499
जिला कार्यक्रम अधिकारी, किन्नौर
01786-223436
जिला कार्यक्रम अधिकारी, लाहौल-स्पिति
01900-222862

खण्ड स्तर
क्रम संख्या
नाम व पता
दूरभाष
क्रम संख्या
नाम व पता
दूरभाष
1.
सी0डी0पी0ओ0 ठियोग
01783-237801
39.
सी0डी0पी0ओ0 बंजार
01903-222732
2.
सी0डी0पी0ओ0
मशोबरा टूटू  
0177-2838213
40.
सी0डी0पी0ओ0 कटराई
01902-241343
3.
सी0डी0पी0ओ0 बसन्तपूर स्थित सुन्नी
0177-2786759
41.
सी0डी0पी0ओ0
नित्थर
01904-265469
4.
सी0डी0पी0ओ0 जुब्बल
01781-252913
42.
सी0डी0पी0ओ0 आनी
01901-253068
5.
सी0डी0पी0ओ0 रोहडू
01781-240585
43.
सी0डी0पी0ओ0 केलंग
01900-222281
6.
सी0डी0पी0ओ0 छौआरा
01781-277242
44.
सी0डी0पी0ओ0 काजा
01906-222258
7.
सी0डी0पी0ओ0 कुमारसेन
01782-240049
45.
सी0डी0पी0ओ0 लम्बागांव
01894-228228
8.
सी0डी0पी0ओ0 चौपाल
01783-260046
46.
सी0डी0पी0ओ0 परागपूर
01970-245214
9.
सी0डी0पी0ओ0 रामपूर
01782-233201
47.
सी0डी0पी0ओ0 बैजनाथ
01894-263429
10.
सी0डी0पी0ओ0 कल्पा स्थित रेकांग पीओ
01786-222466
48.
सी0डी0पी0ओ0 पंचरूखी
01894-254024
11.
सी0डी0पी0ओ0 निचार
01786-253647
49.
सी0डी0पी0ओ0भवारना
01894-247821
12.
सी0डी0पी0ओ0 पूह
01785-232246
50.
सी0डी0पी0ओ0 देहरा
01970-234096
13.
सी0डी0पी0ओ0 सोलन
01792-221640
51.
सी0डी0पी0ओ0 नगरोटा बगवा
01893-253734
14.
सी0डी0पी0ओ0 कण्डाघाट
01792-256367
52.
सी0डी0पी0ओ0 नगरोटा सूरिया
01893-265385
15.
सी0डी0पी0ओ0 कुनिहार स्थित अर्की
01796-220133
53.
सी0डी0पी0ओ0 सुल्हा
01894-200375
16.
सी0डी0पी0ओ0 नालागढ़
01795-222210
54.
सी0डी0पी0ओ0 नूरपुर
01893-221173
17.
सी0डी0पी0ओ0 धर्मपूर(सोलन)
01792-264037
55.
सी0डी0पी0ओ0 इन्दौरा
01970-241300
18.
सी0डी0पी0ओ0 पछाद
01799-236665
56.
सी0डी0पी0ओ0 रैत
01892-239794
19.
सी0डी0पी0ओ0 राजगढ़
01799-220542
57.
सी0डी0पी0ओ0  फतेहपुर
01893-253936
20.
सी0डी0पी0ओ0 नाहन
01702-222077
58.
सी0डी0पी0ओ0 चम्बा
01899-224400
21.
सी0डी0पी0ओ0 पावंटा
01704-222286
59.
सी0डी0पी0ओ0 पांगी
01897-222236
22.
सी0डी0पी0ओ0 संगहाड
01702-481110
60.
सी0डी0पी0ओ0 मैहला
01899-238153
23.
सी0डी0पी0ओ0 शिलाई
01704-278586
61.
सी0डी0पी0ओ0 तीसा
01896-227448
24.
सी0डी0पी0ओ0 धुंधला
01975-262008
62.
सी0डी0पी0ओ0 कांगड़ा
01892-263651
25.
सी0डी0पी0ओ0 उना
01975-225538
63.
सी0डी0पी0ओ0 सलूणी
01896-233436
26.
सी0डी0पी0ओ0 गगरेट
01976-241642
64.
सी0डी0पी0ओ0 चौवाडी
01899-266350
27.
सी0डी0पी0ओ0 अम्ब
01976-261205
65.
सी0डी0पी0ओ0 भरमौर
01095-225074
28.
सी0डी0पी0ओ0 हरोली
01975-284211
66.
सी0डी0पी0ओ0 रिवालसर
01905-240352
29.
सी0डी0पी0ओ0 हमीरपूर
01972-225642
67.
सी0डी0पी0ओ0 मण्डी
01905-225540
30.
सी0डी0पी0ओ0 बिजडी
01972-283597
68.
सी0डी0पी0ओ0 सुन्दरनगर
01907-266946
31.
सी0डी0पी0ओ0 नदौन
01972-232199
69.
सी0डी0पी0ओ0 गोपालपूर
01905-230655
32.
सी0डी0पी0ओ0 सुजानपुर
01972-272856
70.
सी0डी0पी0ओ0 गोहर
01907-250276
33.
सी0डी0पी0ओ0 टौणी देवी
01972-272856
71.
सी0डी0पी0ओ0 करसोग
01907-222252
34.
सी0डी0पी0ओ0 भोंरज
01972-266039
72.
सी0डी0पी0ओ0 धर्मपूर(मण्डी)
01905-272292
35.
सी0डी0पी0ओ0 घुमारवीं
01978-255346
73.
सी0डी0पी0ओ0 चौंतडा
01908-251224
36.
सी0डी0पी0ओ0 झण्डूता
01978-272360
74.
सी0डी0पी0ओ0 दंग
01908-286189
37.
सी0डी0पी0ओ0 बिलासपूर
01978-222773
75.
सी0डी0पी0ओ0 सैराज
01907-244792
38.
सी0डी0पी0ओ0 कुल्लु
01902-223610




Monday, August 29, 2011

National Nutrition Week 2011-12




National Nutrition Week is being celebrated from 1st September 2011 to 7th September 2011. The theme for National Nutrtion Week 2011-12 is 

पोषण  की सीढ़ी चढ़कर बढ़ेगी अगली पीढी - यही है सोच हमारी 
Adequate nutrition iduring infancy and early childhood is essential to ensure the health, growth and development of children to their full potential. Nearly one third  of under five deaths in India are due to under-nutrition
Optimal infant and young child feeding practices are the cornerstone of child care and development. Feeding is critical aspect of caring for infants and young children. 
Article on  nutrition at this website is listed below :


Tuesday, August 2, 2011

World Breastfeeding Week-2011

Theme for World Breastfeeding Week-2011





  • TALK TO ME! BREASTFEEDING - A 3D EXPERIENCE
    WABA is pleased to announce the World Breastfeeding Week theme for 2011 focusing on engaging and mobilising youth intergenerational work with the catchy slogan of: "Talk to me! Breastfeeding - a 3D Experience". The theme deals with communication at various levels and between various sectors.

  • Why 3D?

    When we look at breastfeeding support, we tend to see it in two-dimensions: time (from pre-pregnancy to weaning) and place (the home, community, health care system, etc). But neither has much impact without a THIRD dimension - communication! 

    Communication is an essential part of protecting, promoting and supporting breastfeeding. We live in a world where individuals and global communities connect across small and great distances at an instant's notice. New lines of communication are being created every day, and we have the ability to use these information channels to broaden our horizons and spread breastfeeding information beyond our immediate time and place to activate important dialogue. 

    This third dimension includes cross-generation, cross-sector, cross-gender, and cross-culture communication and encourages the sharing of knowledge and experience, thus enabling wider outreach.

Monday, August 1, 2011

स्तनपान- स्पर्श की तपिश और अनुरक्ति का अहसास



शिशु के जन्म होते ही पहले स्पर्श का भी समय हो जाता है। स्पर्श की तपिश और अनुरक्ति का अहसास इतने बचपन में भी होता है। माँ की गर्मी के पास और साथ रह कर शिशु एक जुड़ाव महसूस करता है, स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है। शिशु को साफ और मुलायम कपड़ो में सही तरीके से लपेट कर जितनी जल्दी हो सके माँ को सौंप देना चाहिये। प्रसव के आधे घंटे के अंदर स्तनपान करवाना चाहिये। यह अवधि सीज़ेरियन प्रसव से हुए बच्चों के लिये एक घंटा मानी जा सकती है।
 Cow's milk is for the calf....your child needs yours!!
गाय का दूध बछड़े के लिये...आपके बच्चे को आपके दूध की जरूरत है।

हर माँ का दूध उसके शिशु के लिये एकदम उपयुक्त होता है। मतलब कि अगर शिशु 28 हफ्ते में ही जन्म ले तो उसके पाचन शक्ति और जरूरत के हिसाब का सही मात्रा में प्रोटीन्स, विटामिन्स और चर्बी दूध में होती है। जैसे उस शिशु के लिये उसके जरूरत के अनुसार खास ऑर्डर पर तैयार किया गया हो।
माँ का दूध मतलब माँ के आँचल में रह कर मिलने वाली खोराक- साफ, बिना झंझट, हमेशा फ्रेश, स्टेरिलाइसेशन की आवश्यकता से दूर, हमेशा माँ के पास, माँ के साथ...सही मात्रा में प्रोटीन, विटामिन्स,ग्लूकोस, फैट। साथ में रोग प्रतिकारक शक्ति। माँ से लगातार गहराता जुड़ाव। काउ मिल्क अलर्जी से दूर।
फायदें इतने हैं कि यह समझना कठिन है कि यहाँ भी फैशन ने बाजी मार ली है। फैशन, ट्रैन्ड, फिगर और कठिनाई जैसे बहानों का इस्तेमाल कर शिशु को इससे वँचित रखना दुखद है।
नवजात शिशु को देखना हमेशा एक सुंदर अनुभव रहा है। माँ के पास गर्म , मुलायम कपड़ों में लिपटा शिशु जल्द ही बगल में मुड़कर माँ को तलाशना शुरु करता है। होठों पर जीभ फेरकर दूध की माँग रखता है। यही सही समय है स्तनपान शुरु करने का।
शिशु के लिये स्तनपान सीखी हुई एक बात है। किन्तु पहली बार बनी माँ के लिये यह एकदम नया अनुभव है। माँ को सहजता से इसकी शुरुआत करनी चाहिये। माँ की विकलता शिशु तुरंत भाँप लेता है...इसीलिये परेशान माँ का शिशु भी अक्सर चिढ़चिढ़ा हो जाता है।
पहली बार स्तन से लगाना अपने आप में एक प्रक्रिया है। इसे लैच्चिंग ऑन कहते हैं। अगर सही तरीके से स्तनपान की शुरुआत की जाये तो माँ और शिशु के बीच के रिश्ते को अच्छी और तनाव रहित शुरुआत मिल सकती है।
1.शिशु का मुँह पूरी तरह खुलवायें। हल्के से शिशु के होंठ स्तन पर लगाने से वह पूरा मुँह खोल देगा...ऐसे जैसे उबासी में खोलते हैं।
2. फिर जिस हाथ में शिशु को सँभाला है उसे पास लाकर शिशु को स्तन के पास लाना है। ध्यान रहना चाहिये कि शिशु को माँ की तरफ लाया जाये ना कि माँ को शिशु की तरफ।
ध्यान रहे कि शिशु के मसूड़े स्तन के आसपास के एरियोला (स्तन के पास गहरे रंग की त्वचा)को पूरी तरह से मुँह के अंदर लें। शिशु के होंठ बाहर की तरफ मुड़े हुए हों।
3. इतना करने पर शिशु स्तन चूस कर दूध पीने की कोशिश करेगा। 
अगर शिशु स्तन से सही तरीके से जुड़ा हो और सही तरह से चूस रहा हो तो इस प्रक्रिया में स्तन में दर्द नहीं उठना चाहिये। अगर दर्द उठे तो स्तनपान रोक कर फिर कोशिश करनी चाहिये। शिशु के स्तन पकड़ने पर वैक्यूम बनता है और सक्शन एफैक्ट से दूध खिंचता है। जब भी शिशु को स्तन से हटाना हो तो स्तन और मसूड़े के बीच उँगली ड़ाल कर पहले वैक्यूम खत्म करें। कभी भी गलत तरीके से स्तनपान जारी ना रखे। इससे स्तन पर चीरे पड़ने का डर रहता है और शिशु को भी पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं मिलता। 
माँ और शिशु के रिश्ते का एक अहम पहलू है स्तनपान। माँ की खुशबू, सपर्श की तपिश, और माँ की गोद की सुरक्षा...इन सबके लिये पहला अनुभव है स्तनपान। स्वाभाविक क्रिया है और जितना सहजता और आनंद से निभाया जाये उतनी ही संतुष्टि दोनो को मिलती है।

छह महीने तक शिशु को मात्र स्तनपान देने से उसकी सभी खोराक की जरूरत पूरी हो जाती है। सिर्फ माँ का दूध उसके लिये पर्याप्त है। इसे एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीड़िंग कहते हैं। छह महीने से माँ के दूध के अलावा कुछ और भी शुरू किया जाना चाहिये। स्तनपान मात्र खोराक ही नहीं पूरा करता किंतु इससे शिशु का पहला स्नेह संबंध बनता है। 
कहते हैं भगवान ने माँ को इसलिये बनाया क्योंकि हर जगह हर समय हर शिशु के पास नहीं रह सकता....काश हर शिशु के पास उसका अपना भगवान ......उसकी माँ हो....जो उसे ममता से सँभाल,दूध से सींच,स्नेह से छू....उसको उसकी अपनी पहचान दे.....